अब मनमाने तरीके से नहीं चलेगा यमुना प्राधिकरण का बुलडोजर हाई कोर्ट ने जारी किया आदेश

ग्रेटर नोएडा। डॉ सतीश शर्मा जफराबादी
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तोड़फोड़ करने वाला बुलडोजर अधिकारियों की मनमानी से नहीं चलेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के बुलडोजर पर अंकुश लगाने के लिए आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के निर्माण ध्वस्त करने पर रोक लगा दी है।
अब यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। अधिकारी कहीं भी अवैध निर्माण का हवाला देकर बुलडोजर चलवा रहे थे।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब प्राधिकरण किसी भी निर्माण पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं कर सकेगा। पहले विधिक नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना होगा। बिना कानूनी प्रक्रिया निर्माण को ध्वस्त करना पूरी तरह अवैध होगा।
इस संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह और न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मामले में सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बिना निर्माण नहीं गिराया जा सकता।
जेवर स्थित जेवर बांगर की खसरा संख्या 573 और 574 के तीन मालिकों ने इस संबंध में हाईकोर्ट में अपील की थी। जिसमें कहा गया था कि यीडा उनकी जमीन पर बने मकान और अन्य निर्माणों को बिना किसी वैध आदेश के ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है। अपील में कोर्ट से मांग की थी कि जब तक विधिक प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न की जाए। यीडा और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्माण को गिराने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। सरकारी एजेंसियां मनमाने तरीके से बुलडोजर चलाने की कार्रवाई नहीं कर सकतीं। व्यक्ति की संपत्ति और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करने वाली कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रभावित पक्ष को पहले नोटिस देना और पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है।
ज्ञात होगी यमुना विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2025 जेवर, झज्जर, दनकौर और टप्पल के इलाकों में काफी जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त किया था। प्राधिकरण इस निर्माण को अवैध बता कर बुलडोजर की कार्रवाई कर रहा था। जबकि इसके विरोध में कॉलोनाइजर खरीददार लोगों में काफी रोष देखने को मिल रहा था। प्राधिकरण के अफ़सरों का कहना था कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही बुलडोजर की कार्रवाई की जाती है। जबकि जो लोग इस बुलडोजर की कार्रवाई से प्रभावित थे उनका आरोप था कि बिना किसी नोटिस सूचना और बिना कब्जाधारक का पक्ष जाने ही प्राधिकरण मनमानी तरीके से बुलडोजर की कार्रवाई कर तोड़फोड़ कर रहा था।



